दिल और दिमाग

Sync the both

उतरायन के दिन एक बार पतंग और डोरी के बीच लड़ाई हो गई , लड़ाई इतनी बढ़ गई की दोनों ही सिर्फ अपनी अपनी ही बड़ाई मारने लगे , पतंगने कहा की मे ऊपर हवामे उड़ता हु तो सिर्फ अपने दम पर और डोरी ने कहा की तु हवामे उड़ता है तो सिर्फ मेरे दम पर अगर मे तुजे छोड़ दु तो तु तुरंत नीचे गिरने लगेगा , तभी हवाने इनकी लड़ाई को बीचमे रोक कर कहा की , “ दोस्तो तुम दोनों ही अपना अपना महत्व रखते हो , अगर डोरी न होती तो पतंग ऊपर हवामे न उड़ पाती और पतंग न होती तो डोरी तू भी आसमान मे इतने ऊपर न जा पाती , आसमान मे सबसे ऊपर हवामे अकेले लहेराते पतंग के साथ डोरी भी होती है , अगर डोरी छोटी तो पतंग नीचे आ जाएगी , इसीलिए उतरायन के इस महोत्सव मे आप दोनों का महत्व एक समान है ” मे इस पुरी घटना को अपने नज़रिये से देख रहा था ओर मेरे दिमाग मे 1क बात आई..... हमारे पास दो Mind है एक Conscious Mind ओर दूसरा Sub-Conscious Mind , मेरे नज़रिये से कहु तो Conscious Mind यानि जागरूकता , हमारी सोच , तर्क , बुद्धि , यानि हमारा दिमाग और Subconscious Mind यानि हमारे Emotions , हमारा दिल । हर दिन इन दोनों के बीच मे लड़ाई चलती रहेती है , दिमाग कहेता है की मे जो सोचता हु वो सही तो दिल कहेता है ये नहीं करना चाहिए तु ये कर, मे कहे रहा हु वो सही है , और हमारा अनुभव हमे कहेता है की कभी कभी दिमाग सही होता है और कभी कभी दिल । तो फिर किसकी सुने ? हम हमेशा इस दिल ओर दिमाग के बीच मे फसे रहेते है लेकिन पतंग और डोरी की इस लड़ाई ने मुजे ज़िंदगी का एक सबसे बड़ा सबक सीखा दिया । मैंने अपने अनुभवो से जाना है की , हमे दिल और दिमाग दोनों की सुननी चाहिए , जब हम कोई निर्णय दिल से करने जाते है तो उस समय हमे थोडी दिमाग की भी सुननी चाहिए और अंत मे दिल और दिमाग दोनों को मनाके निर्णय लेना चाहिए । क्योंकि दिल और दिमाग दोनों ही अपनी अपनी जगह पर सही होते है , लेकिन सिर्फ किसी एक का ही इस्तेमाल करने वाला हमेशा असफल होता है , अंत मे जब हमे दिल सही लगे उस वक्त दिमाग को भी ये समजाना ज़रूरी है की दिल क्यो सही है , और जब दिमाग सही लगे तब दिल को ये समजाना ज़रूरी है की दिमाग क्यो सही है , लेकिन दोनों की मजूरी लिए बिना कोई काम किया और वो काम गलत हुवा तो हम अनजाने मे दिल या दिमाग मे से किसी 1क को दोषी ठहेरायेंगे और फिर किसी 1क के प्रति हमारा विश्वास कम हो जाएंगे , और फिर वो हमारी मान्यता बन जाएंगी । इसीलिए किसी एक की बात मान के दूसरे को कमजोर करने की बजाए दोनों को साथ लेकर चलने मे ही हमारी भलाई है । जीवन मे हमे प्यार ( दिल ) और बुद्धि ( दिमाग ) दोनों का इस्तेमाल करना ज़रूरी है । Conscious Mind के 10 % Powers और Sub-Conscious Mind के 90% Powers मिलके ही 100 % हो पता है , और जब तक हम अपने काम मे अपना 100% न दे पाये तब तक वो काम कभी बुलंदियों पर नहीं पहोच पाएगा । तो याद रखे : दिल + दिमाग = सफलता उतरायन के इस महोत्सव से सीखी हुई ये बात पुरी तरह समज लो के जिस तरह पतंग और डोरी दोनों के साथ से ही ये उतरायन महोत्सव संभव है उसी तरह जीवन का ये “ आनंद महोत्सव ” भी दिल और दिमाग दोनों के साथ से ही संभव है । Live life in Balance दिल से अच्छा लगा ? तो Like करो और दिमाग का इस्तेमाल करके अपने दोस्तो को Share भी करो यारो । © चिराग उपाध्याय.

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