हार

Accept learn & Move on...

दोस्तो जीवन मे कई ऐसे मोड़ आते है जहा हमे हार का सामना करना पडता है , और उस समय हमारा मन उदास हो जाता है । उस समय इस व्यथित मन मे कई सारे विचार पनपने लगते है जो ज़्यादातर नकारात्मक होते है , और इस वजह से धीरे धीरे इंसान अपने आसपास नकारात्मक वातावरण से घिर जाता है । ये नकारात्मक वातावरण हमारी बौद्धिक क्षमता और ज्ञान पे सीधा प्रहार करता है और इस परिस्थिति से लड़ने की , हमारी क्षमता होने के बावजूद भी हम अपनी सारी क्षमताओ को भूल जाते है । परिणाम उदासी या फिर गुस्सा । और फिर ये गुस्सा हमसे न जाने क्या क्या करवा लेता है जो शायद हमारे जीवन के लिए उचित न हो । तो क्या इसका कोई उपाय है ? हा है , यहा हमे एक बात याद रखनी है की हमारी इस हार का हमारे जीवन की असफलता से कोई सीधा संबंध नही है , किंतु हारने के प्रती हमारे रवैए का सीधा संबंध ज़रूर है । और एक बात , हमारे जीवन की सफलता से , इस हार का कोई ना कोई परोक्ष संबंध ज़रूर हो सकता है जो शायद हमे अनेवाले कल मे समज आये । हम हारते है अपनी गलतियों की वजह से और सिखते है भी अपनी गलतियों की वजह से. तो अगर इस हार को एक नया अनुभव मानके चले , तो आज की इस हार को हम आनेवाले कल मे जीत मे बदल सकते है । तो संदेश ये है की हार के प्रति अपने रवैये को सुधारे , इस हार को खुले दिल से स्वीकार करे , सबक सीखे , उसे जीवन मे उतारे और हार को जीत मे बदले । और हमेशा याद रखे " हार केवल एक मानसिक स्थिति है , इससे ज्यादा कुछ नही " Feel Free to Share © चिराग उपाध्याय.

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