धैर्य

Key to solve all problems

दोस्तो मेरे खयाल से , इस दुनिया के ज्यादतर लोगो की , सबसे बड़ी कमज़ोरी कोई है तो वो है “ धैर्य न रखना ” । हर इंसान कोई कर्म करके फल की आशा रखता है , लेकिन उस फल को पाने के लिए वो धैर्य नहीं रख पाता , क्योंकि 21 वी सदी मे हमारा स्वभाव ही कुछ ऐसा हो गया है , की हमे हर बात मे जल्दी रहेती है । और इस जल्दबाज़ी मे हम ये भी भूल जाते है की ये दुनिया कुछ सिद्धांतो पर चलती है , हर कर्म अपने साथ कोई न कोई फल अवश्य लेकर आता है , और हम ये भी जानते है की हम जैसा बीज बोएँगे वैसा ही फल , हमे मिलेगा , अगर आम का पेड़ लगाएंगे तो आम मिलेगा और अगर सेब का पेड़ लगाएंगे तो सेब मिलेगा , लेकिन सबसे ज़रूरी बात ये है की , ये सब 1क दिन मे नहीं होता , कोई भी बीज बोने के बाद हमे उसकी देखभाल करनी पड़ती है , हर रोज़ उस बीज को पानी पीलाना पड़ता है , ज़रूरी खाध डालनी पड़ती है , और इस बीच उसकी आस-पास की जगह मे उगने वाली दूसरी वनस्पतिओ को काटना पड़ता है , उस बीज की , पौधे से लेकर बड़े पेड़ बनने तक की इस यात्रा मे , हर दिन , हमे ये सुनिश्चित करना होता है , की जिस फल को पाने की आशा से के साथ इस पेड़ को लगाया है, वो फल तक ये यात्रा सही सही पहोच पाये । और फिर सब कर्म पूरा होने के बाद आखिर मे हमे उस पेड़ पर फल लगे , तब तक इंतज़ार करना होता है , हमारी थोड़ी सी जल्दबाज़ी भी उस फल को कच्चा रख सकती है और फल ठीक तरीकेसे उग नहीं पाएगा । यहा पर जैसे कुदरत के कुछ नियम है वैसे ही हमारे जीवन मे भी फल प्राप्त करने के लिए कुदरत के कुछ नियम है । जब हम भी किसी फल की आशा मे कोई कर्म करते है ( वैसे गीता के अनुसार हमे फल की आशा ही नहीं रखनी चाहीए सिर्फ कर्म पर ध्यान देना चाहिए ) तब हमे जो फल चाहिए उस फल के लिए ज़रूरी काबेलियत बनानी पड़ती है , ज़रूरी ज्ञान लेना पड़ता है और इस बीच आने वाली तकलीफ़ों का सामना करना पड़ता है , नकारात्मक्ता को दूर करना पड़ता है और अंत मे सब कुछ सही सही करने के बाद भी जब तक फल पक न जाए तब तक थोड़ा इंतज़ार करना पड़ता है , कुदरत आपके कर्म के अनुसार आपको फल अवश्य देगी । लेकिन सब कुछ करने के बाद ये आखरी वाला काम “ धैर्य रखना ” हम नहीं कर पाते है और जल्दबाज़ी मे अपना आपा खोके कुछ ऐसा कर बैठते है जिससे सारे किये-कराये पर पानी फिर जाता है , बाढ़ आ जाती है । और फिर अंत मे हम उस ऊपरवाले पर से भी अपना विश्वास खो देते है । और ऊपर वाले से कहेते है मैंने तो सब कुछ किया तो फिर मुजे फल क्यू नहीं मिल रहा ? इसीलिए ज़रूरी है , धैर्य रखने की आदत डाले , फल अवश्य मिलेगा । सवाल ये है की ये आदत को कैसे विकसित की जाए ? दोस्तो मेरा अनुभव ये कहेता है की , इस आदत को विकसित करने के लिए ध्यान करना अत्यंत आवश्यक है , इससे हमारा मन शांत रहेगा और ईश्वर के साथ हमारा जुड़ाव और भी मजबूत बनेगा , साथ ही साथ हर कर्म को सही तरीके से करने की एक अदभूत शक्ति मिलेगी जो मैंने खुद महेसूस की है । याद रखे , ध्यान करे , धैर्य रखे , मन को शांत रखे । फल अवश्य मिलेगा । अच्छा लगे तो दोस्तोको Share करे । © चिराग उपाध्याय.

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