Peace

Key to have a helathy life

दोस्तो हर इंसान जन्म से ही भुखा होता है.... किस चीज़ की भुख ? पेट की भुख तो है ही लेकिन साथ ही साथ जीवन की कुछ और भी ज़रूरी भुख है जेसे की ... प्यार की भुख , प्रोत्साहन पाने की भुख, प्रशंषा पाने की भुख , पैसे कमाने की भुख , नाम , इज्जत और शोहरत कमाने की भुख , लेकिन सबसे बड़ी भुख है " मन की शांति " की भुख । इंसान अपने जीवन मे जितनी भी भागा - दौड़ी करता है वो सब कुछ जीवन की सबसे महत्वपुर्ण भुख के लिए ही होता है और वो है " मन की शांति " की भुख । शायद , बहोत भागा-दौड़ी करने के बाद , हम हमारी जीवन ज़रूरी सभी भुख को पूरी तो कर लेंगे लेकिन फिर भी कुछ बाकी है ऐसा लगेगा क्यूंकी शायद 1क भुख जो सबसे महत्वपुर्ण है उसे पूरी नहीं कर पाते और वो है " मन की शांति " की भुख । इसीलिए शायद हमारा Ultimate लक्ष्य मन की शांति ही है , लेकीन हर इंसान इसी लक्ष्य के पीछे भागता होने के बावजूद भी सवाल ये है की क्या हर इंसान की ये भुख पूरी हो जाती है ? कहीं न कहीं इंसान की ये भुख अधूरी सी ही रहे जाती है , हैना ? मै खुद भी इस भुख को लेकर कई बार परेशान हुवा हु , और मज़े की बात तो ये है की मैंने अनुभव किया है की अगर इस भुख को हम 1क बार पूरी करे तो कुछ समय के बाद ये और भी तीव्रता से लगती है और हम फिरसे इसे पूरी करने मे लग जाते है , और ये cycle चलती ही रहेती है , तो मै तो " अपने अनुभवो से " ये समज गया की हमे बार बार और लगातार इस भुख को पूरा करने के लिए कर्म करते ही रहेना पड़ेगा , ( गीता मे भी कहा गया है की हम कर्म करने से विमुख तो हम हो ही नहीं सकते ) अब सवाल ये होता है की कौनसा कर्म करे , या किस तरीकेका कर्म करे जिससे हमारी ये सबसे महत्वपुर्ण भुख पूरी की जा सके ? जब मैंने अपने आप से ये सवाल बार बार पूछा तो " मुजे अपना उत्तर मिला " और फिर वैसा ही कर्म बार बार करके मुजे ये पक्का अनुभव हो गया , की इस भुख को बार बार पूरी करते रहेने का मार्ग यही है मैंने अभी अभी कहा की मुजे “ अपना उत्तर मिला " मतलब आपका उत्तर , अलग हो सकता है , उस उत्तर को स्वयं खोजे , अपने भीतर जाए और अनुभव करने की कोशिश करे की किस तरीके से कर्म करने से आपको मन की शांति मिलती है , मैंने भी यही किया था आपकी सहयता के लिए यहा मै , मेरे उत्तर को आपसे Share कर रहा हु , लगातार मन की शांति पाने के लिए मुजे जो मार्ग जो मिला वो मार्ग है " स्वयं से ऊपर उठकर कर्म करने का मार्ग " जब से मुजे ये मार्ग मिला तब से , मै अपना ज़्यादातर कर्म करते समय , स्वयं से ऊपर उठकर ये सोचता हु , की इस दुनिया मे , मेरे इस कर्म से , मे क्या " योगदान " कर रहा हु ? मै क्या Contribute कर रहा हु ? यहा मैंने " ज़्यादातर " शब्द इसीलिए कहा क्योंकि कई बार मै अपनी इस सोच के अनुसार कर्म नहीं कर पाता , लेकिन कोशिश हर बार करता हु , और इसी वजह से मेरी " मन की शांति की भुख " फिर से अधूरी रहे जाती है , और फिर से मै इसे पूरी करने के चक्कर मे लग जाता हु और ये cycle चलती रहेती है जीवन के अब तक के अनुभव से मै इतना ज़रूर समज गया की , जब हम पूरी तरह से अपने उस " उत्तर " के अनुसार जीवन जीने के आदि हो जाएंगे , तब जीवन मे होगा सिर्फ " आनंद , आनंद और परम आनंद " अब बिना विलंब किए अपने उस “ उत्तर ” को खोजने मे लग जाए जो आपकी “ मन की शांति पाने की भूख को लगातार पूरी करता रहे । अच्छा लगा तो Like करे और अपने दोस्तोको ज़रूर Share करे , आनद मिलेगा । आपका दोस्त - " चिराग उपाध्याय ".

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