परिवर्तन , बदलाव - Change

Change is the inevitable..change is constant

इस दुनियामे " परिवर्तन " अचल हे । " लोग कहेते हे की वक्त के साथ इंसान बदल जाता हे । लेकिन गलती उसकी नहीं जो बदल जाता है , गलती तो उसकी है जो पहेले जैसा ही रहे जाता हे । क्यूंकी परिवर्तन ही संसार का नियम हे । " बदलाव आता हे समय के साथ और जो समय के साथ नहीं बदलते वो प्रगति नहीं कर सकते । इस दुनियामे ऐसे कई मुद्दे है जहा बदलाव की सकत ज़रूरत है ,और मेरे खयाल से इस दुनिया के ज़्यादातर इंसान " सकारात्मक बदलाव " लाने के लीये उत्सुक भी है । ये सकारात्मक बदलाव अलग अलग क्षेत्र मे हो सकते है , कोई Education System मे बदलाव लाना चाहता है तो कोई कानून व्यवस्था मे , कोई देश की सरकार की कार्य प्रणाली को बदलना चाहता है तो कोई अपने राज्य मे सकारात्मक परिवर्तन लाना चाहता है । अब सवाल ये है की हम कौनसा बदलाव लाना चाहते है ? और हम खुद इस बदलाव को लाने के लीये क्या कर रहे है ? दुनिया मे कोई भी बदलाव की शुरुआत एक इंसान से शुरू होती है , उसके एक विचार से शुरू होती है , और उस विचार की और उठे उसके पहेले कदम से शुरू होती है , चाहे वो कदम अभी सही हो या ना हो , लेकिन बदलाव की और उठा हुवा कदम आज नहीं तो कल कारवां बनके अपनी मंज़िल तक पहोच ही जाता है । लेकिन सवाल फिर भी यही है की हम खुद सकारात्मक बदलाव के लीये क्या कर रहे है ? ये बदलाव भी दो तरह का होता है , बाहरी बदलाव और अंदरोनी बदलाव । क्या हम इन दोनों पर काम कर रहे है ? जब तक अंदरोनी बदलाव नहीं आयेगा तब तक शायद बाहरी बदलाव लाना मुश्किल है । आज का समय बहोत तेज़ी से बदल रहा हे और 21वी सदी की इस speed से तालमेल मिलना थोड़ा मुश्किल सा होता जा रहा हे । बदलाव इतनी तेज़ी से हो रहा हे की पहेला बदलाव हमारी समज मे आए उससे पहेले दूसरा बदलाव भी हो जाता हे और ये बदलाव technology से लेकर हमारे संबंधो तक हर जगह हो रहा हे , पल भर मे इंसान बदल जाते हे , technology , संबंध , काम करने का तरीका हर चीज़ बदल जाती हे । और इस दुनिया से तालमेल मिलाने मे हम कही पीछे छूटे जा रहे हे । तो मे सोच रहा था इसका उपाय क्या हे ? मेरे अनुभव से कहु तो कही न कही ये सारी समस्याओ का जड़ ये हे की हम अपने आप से तालमेल नहीं मिला पा रहे , हमारा शरीर और मन हर वक्त भागता रहेता हे । हम असल मे भाग रहे हे शांति के लिए लेकिन उसके लिए कोई काम नहीं कर रहे हे । हमारा शरीर और मन इस श्रुष्टि से सीधा तालमेल रखता हे , अगर हम अपने आप से यानि स्वयं से तालमेल मिलना सिखले तो इस दुनिया से ज़रूर तालमेल मिला पाएंगे । और इसके लिए प्रमाणभूत रास्ता 1क ही हे और वो हे " ध्यान " । ध्यान से हम श्रुष्टि के बहाव मे बहेने लगते हे और फिर इस दुनिया मे होने वाला बदलाव स्वयं हमसे तालमेल मिलाने लगेगा , और हम श्रुष्टि के साथ स्वतः ही बदलने लगेंगे , ये मेरा व्यक्तिगत अनुभव हे । कभी आप भी इस मार्ग पर चल के देखिये ..... हर रोज़ कम से कम 15 मिनिट ध्यान करे और फिर देखे चमत्कार ...... याद रखे : " वही इंसान दुनिया को बदल सकता है , जो अपने आप को बदलने की ताकत रखता है " - चिराग उपाध्याय अच्छा लगा तो Share ज़रूर करे ।.

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